उत्तराखंड उच्च न्यायालय लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की बैठक नही करने पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने राज्य सरकार को 24 घंटे के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि अभी तक पूर्व के आदेश का अनुपालन क्यों नही हुआ। कोर्ट ने कहा कि जवाब दाखिल नहीं करने की स्थिति पर सचिव 15 मई को 11 बजे कोर्ट में पेश होंगे।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही की है। जबकि संस्थान के नाम पर वार्षिक दो से तीन करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। जनहित याचिका में कहा कि कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जा रही है परंतु उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है। जनहित याचिका में कहा कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है "जिसके पास यह अधिकार हो की वह बिना शासन की पूर्वानुमति के, किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजिकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका संपूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है, एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाए।
Picture Source :

